चूड़धार यात्रा पर रोक : सर्दी और ठन्डे मौसम का आगाज

चूड़धार यात्रा पर रोक : सर्दी और ठन्डे मौसम का आगाज

अब चूड़धार यात्रा जाने पर रोक लगा दी गई है क्योंकि सर्दी के मौसम में बर्फबारी का डर बहुत रहता है, तापमान भी काफी कम हो गया है।



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कोरोना का खौफ और न ही प्रशासन का कोई डर। इन दिनों सिरमौर की सबसे ऊंची चोटी व प्रसिद्ध धार्मिक स्थल चूड़धार में  लोगों का हुजूम उमड़ रहा है। हलांकि मंदिर के कपाट पिछले करीब 8 महीने से बंद है। प्रशासन ने चूड़धार यात्रा पर पूरी तरह से रोक लगाई हुई है। मगर प्रशासन के आदेशों को ठेंगा दिखाकर भारी संख्या में लोग चूड़धार पहुंच रहे हैं।

चूड़धार पहुचने वालो में अधिकतर संख्या युवा हैं। लाखों लोगो की धार्मिक आस्था का केंद्र चूड़धार को अब लोगों ने ट्रैकिंग स्पॉट बना दिया है। लेकिन जब से देशभर में कोरोना महामारी फैली है तबसे यात्रा पर पूर्ण रूप से प्रतिबंद लगाया हुआ है।

चूड़धार पहुंचने पर न तो श्रद्धालुओं को देवता के दर्शन करने की अनुमति है और न ही ठहरने की कोई व्यवस्था है। कई लोग बीच रास्ते मे जाकर टेंट लगाकर रात को आराम करते हैं। प्रदेश के अलावा अन्य  राज्यों से भी भारी संख्या में यात्री चूड़धार पहुंच रहे हैं।

जब से प्रदेश सरकार ने पर्यटकों को पर्यटक स्थल जाने की खुली छूट दी है तब से पर्यटक बेफिक्र होकर यात्रा कर रहे हैं। हालांकि मुख्य द्वार नोहराधार में पुलिस के जवान तैनात हैं। मगर फिर भी चूड़धार पहुंचने के लिए मुख्य द्वार नोहराधार, संराह, तरहा, व पुलवाहल आदि रास्तों से पुलिस की नजरों से बचते हुए रोजाना 100 से 200 श्रदालु चूड़धार पहुंच रहे हैं।

चूड़ेश्वर सेवा समति के प्रबंधक बाबू राम शर्मा ने बताया कि वह लोगों से बार बार अपील कर रहे हैं कि चूड़धार न आएं। बावजूद इसके भारी संख्या में लोग चूड़धार पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि मंदिर के कपाट बंद हैं। लंगर सेवा भी बंद है। यात्रियों के लिए ठहरने की व्यवस्था भी नहीं है। मगर लोग अपने टेंट लगा कर यहां ठहर रहे हैं।

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THE enchanting Churdhar peak in Sirmaur is one of the highest Peak of Shivalik ranges at a height of 11965 feet. Churdhar, commonly known as Churichandni (Bangle of Snow), is blessed with some of the most spectacular and beautiful landscapes in this region. The view from the summit embraces a vast panorama of lowland tracts towards the south and snow-capped ranges, including the peaks of Badrinath and Kedarnath in the Garhwal region, towards the north.A wealth of herbs and beautiful alpine flora cover these Himalayan slopes. Walking through the wildlife sanctuary, one spots the spectacular monal, Himachal’s state bird, along with koklass and kaleej pheasants. The canine-toothed musk deer and the endangered Himalayan black bear inhabit the higher forests.Below the summit is the deodar-roofed, single-storey, square temple of Srigul with a lingam, dedicated to Shiva (Chooreshwar Mahadev). Pilgrims sing and dance at night during the Navratras fair in this ancient temple.Trekkers tread over small glaciers on their way to the wind-blown Churdhar summit, which has moderate to heavy snowfall (average of 33 feet snow). Often the Srigul temple gets buried under it.A view of the rainbow emerging on the horizon after the rain, is a memorable sight. The multi-coloured rays streaming out of the cloud cover, make the sky look like a huge chandelier.

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  • Sirgul Mahadev






















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