10 दिसंबर : अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस’ को तौर पर मनाया जाता है यह दिन : Human Rights Day December 10

10 दिसंबर : ‘अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस’ को तौर पर मनाया जाता है यह दिन



नयी दिल्ली, नौ दिसम्बर (भाषा) मानवाधिकार संरक्षण के लिहाज से 10 दिसम्बर के दिन का खास महत्व है। इस दिन 
को ‘अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस’ के तौर पर मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र ने 1950 में दस दिसम्बर को मानवाधिकार दिवस घोषित किया था, जिसका उद्देश्य विश्वभर के लोगों को मानवाधिकारों के महत्व के प्रति जागरूक करना और इसके पालन के प्रति सजग रहने का संदेश देना है।

1878 : जामिया मिलिया इस्लामिया के संस्थापकों में से एक मोहम्मद अली जौहर का रामपुर में जन्म।

1878 : चक्रवर्ती राजगोपालाचारी का जन्म।

1896 : नोबेल पुरस्कार के संस्थापक अल् फ्रेड बर्नहार्ड नोबेल का निधन।

1898 : पेरिस संधि के बाद स्पेन-अमेरिका युद्ध समाप्त हुआ।

1902 : तस्मानिया में महिलाओं को मत देने का अधिकार मिला।

1950 : इस तारीख को संयुक्त राष्ट द्वारा अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस घोषित किया गया।

1992 : गुजरात में देश की पहली होवरक्राफ्ट सेवा की शुरूआत।

2001 : दिग्गज अभिनेता अशोक कुमार का निधन।

2007 : क्रिस्टीना फर्नांडीज डी किर्चनेर अर्जेंटीना की पहली महिला राष्ट्रपति बनीं।

2016 : तुर्की के इस्तांबुल में एक फुटबॉल स्टेडियम के पास दो धमाकों में 38 लोगों की मौत।

Human Rights Day December 10

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस : वाराणसी में मशाल जुलूस निकालकर मानवाधिकार के प्रति किया जागरूक

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस की पूर्व संध्या पर लोक समिति कार्यकर्ता और दिहाड़ी मजदूरों ने बीरभानपुर गांव में मशाल जुलूस निकाली।
Publish Date:Thu, 09 Dec 2021 09:51 PM (IST)
वाराणसी, जागरण संवाददाता। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस की पूर्व संध्या पर लोक समिति कार्यकर्ता और दिहाड़ी मजदूरों ने गुरुवार को बीरभानपुर गांव में मशाल जुलूस निकाली। सैकड़ो की संख्या में ग्रामीण गांव के पंचायत भवन पर एकत्रित होकर सभा किया फिर हाथ में मशाल लेकर तख्ती, बैनर के साथ गांव की विभिन्न बस्तियों में रैली निकाली। इस दौरान लोगों ने रोटी कपड़ा और मकान, माँग रहा मजदूर किसान,भीख नही अधिकार चाहिये जीने का सम्मान चाहिए, जुल्म करेंगे नहीं जुल्म सहेंगें नही आदि नारे लगाकर मानवाधिकार के प्रति ग्रामीणों को जागरूग किया. सभा में मजदूरों ने कहा कि सभी को बिना भेदभाव के जीने का अधिकारी होना चाहिए। कोरोना महामारी के समय में देश का सबसे बड़ा तबका मजदूर कोरोना से तो लड़ ही रहा है, पर उसके साथ-साथ अत्याचार,भय, भूख और रोज़गार के संकट से भी जूझ रहा है. हम सभी जानते हैं कि कुल मजदूरों के 93% प्रतिशत मजदूर असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं, जिनकी कोई सामाजिक सुरक्षा नहीं है. वे गरीबी से भयंकर रूप से लड़ रहे हैं. जिनके मानवाधिकारों की रक्षा करना जरुरी है।

इस अवसर लोक समिति संयोजक नन्दलाल मास्टर ने कहा कि मानवाधिकार यह सुनिश्चित करता है कि हर व्यक्ति को भोजन के साथ सम्मान मिले. देश में संविधान के अनुसार बिना किसी भेदभाव के समान अधिकार एवं समान अवसर उपलब्ध कराए जाएं. आज पूरे विश्व में मानवाधिकारों का हनन हो रहा है. इसका प्रमुख कारण मानव अधिकारों के प्रति अनभिज्ञ होना है. सरकार को चाहिए कि मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता अभियान चलाए. संयुक्त राष्ट्र महासभा में अंतर्राष्ट्रीय मानवधिकार दिवस की 10 दिसंबर 1948 की घोषण की थी. यह एक सार्वभौमिक घोषणा पत्र है, जो मानव अधिकारों के प्रति लड़ाई लड़ता है. मानवाधिकार दिवस मनाने का मुख्य उद्देशय लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना है।

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